कक्षा सातवीं पाठ 2(दादी माँ)


प्रकरण- दादी माँ

लेखक- शिवप्रसाद सिंह

शब्दार्थ-

कठिनाई- मुश्किल। शुभचिंतक-भला सोचने वाला। प्रसन्न- खुश। शीत- ठंड। स्वच्छ- साफ़। विचित्र- अनोखी। जलाशय- तालाब। शीतलता-ठंडक। प्रतिकूलता-अनुकूल परिस्थिति न होना। शरद- सरदी (सर्दी) का महीना।  धुँधली- अस्पष्ट। क्वार- हिन्दी कैलेडर का एक महीना ( जैसे-चैत, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन, भाद्र (भादो) , क्वार, कार्तिक, अगहन, पूस, माघ फाल्गुन)। सिवान- सीमा। अधगली- आधी गली हुई। खौलते- उबलते। गंध- महक।
अफ़सोस- पछतावा। हुड़क- चाहत। ज्वर- बुखार। स्नेह सने- प्यार से भरकर। सन-जूट। लेप- मलहम। सरसाम- सिर पर चढ़ने वाला बुखार। अनुमान- अंदाज़ा। विशुचिका- छूत से होने वाली बीमारी। लवंग- लौंग। नाड़ी- नब्ज। हाँडी- एक प्रकार का मिट्टी का बरतन। कुनैन मिक्सचर- एक प्रकार की दवाई। तिताई- तिखापन। 
शब्दार्थ-2 (पाठ दादी माँ)
उत्साह- उमेग, जोश। आनंद- मज़ा। कार-परोजन- काम करने का उद्देश्य। विलंब- देर। निकासार- निकास स्थान। सूद- ब्याज। अनुपस्थिति- गैर हाजिर। शरम- लाज। दुबकी- सहमी। नाक रगड़ना- खुशामद करना।
 अप्रिय- जो पसंद न हो। विह्वल- घबराया हुआ। उरिन- ऋण से मुक्त। अभिनय- नाटक। पुत्रोत्पत्ती- पुत्र का पैदा होना।  दालान-आँगन। आपत्ति- मुसिबत, रोक, विरोध करना। कथा- कहानी।
 भेद -रहस्य। अपराध गुनाह। अभयदान- निर्भयता प्रदान करना। वात्याचक्र- घटनाक्रम, चक्रवात। श्राद्ध- पूर्वजों के लिए किया गया काम,अंतिम संस्कार। अतुल- बहुत अधिक सम्पत्ति। व्यय- खर्च। अकसर- प्रायः। स्नेहपूर्ण-प्रेम से भरपूर।
 संदूक- बक्सा। सहेजकर- सँभालकर। निशानी- चिह्न।
 शापभ्रष्ट- शापग्रस्त। विलिन- समाप्त होना। घिनौनी- घृणित। काली पाँखें- काली पंख। कतारें- पंक्तियाँ।
प्रश्न-
1.      दादी माँ पाठ के लेखक का नाम लिखिए।

2.      दिन में बाहर चादर लपेटे कौन सोया था?
3.      दादी माँ कैसे पानी में नहाकर आई थी?
4.      दादी माँ की धोती कैसी थी?
5.      किसके विवाह के दिनों की बात है?
6.      विवाह से चार-पाँच दिन पहले औरतें क्या करती हैं?
7.      विवाह की रात को औरतें क्या करती हैं?
8.      पुत्रोत्पत्ति शब्द का संधि-विच्छेद करें। (जैसे- विद्यालय= विद्या+आलय)
9.      दादी माँ किसकी मूर्ति प्रतीत होती थीं?
10. लेखक को किस  बात का यकिन नहीं हो रहा था?
11. क्वार के दिन आते ही लेखक को क्या लगने लगता है?
12. गाँव में क्वार के दिनों की क्या विशेषता होती है?


निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
मुझे लगता है जैसे क्वार के दिन आ गए हैं। मेरे गाँव के चारों ओर पानी ही पानी हिलोरें ले रहा है। दूर के सिवान से बहकर आए हुए मोथा और साईँ की अधगली घासें, घेऊर और बनप्याज की जड़ें तथा नाना प्रकार की बरसाती घासों के बीज, सीरज की गरमी में खौलते हुए पानी में सड़कर एक विचित्र गंध छोड़ रही है। रास्तों में कीचड़ सूख गए हैं और गाँव के लड़के किनारों पर झाग भरे जलाशयों में धमाके से कूद रहे हैं। अपने-अपने मौसम की अपनी-अपना बातें होती हैं। आषाढ़ में आम और जामुन न मिले, चिंता नहीं, अगहन में चिउड़ा  और गुड़ न मिले दुख नहीं, चैत के दिनों में लाई के साथ गुड़ की पट्टी न मिले, अफ़सोस नहीं, पर क्वार के दिनों में इस गंधपूर्ण झाग भरे जल में कूदना न हो तो बड़ा बुरा मालूम होता है।
(क)                      इस गद्यांश के पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए।
(ख)                      क्वार के दिन आते ही लेखक को क्य लगने लगता है?
(ग)  गाँव में क्वार के दिनों की क्या विशेषता होती है?
(घ) क्वार के दिनों में सिवान (नाले) के पानी में क्या-क्या बहकर आता था?
(ङ)  लेखक को क्या बुरा लगता था?
(च)  गंध भरे जलाशयों में नहाने के लिए क्या-क्या छोड़ने को तैयार है?
गृह-कार्य
1.     लेखक को अपनी दादी माँ की याद के साथ-साथ बचपन की और किन-किन बातों की याद आ जाती है?
2.     दादा की मृत्यु के बाद लेखक के घर की आर्थिक स्थिति खराब क्यों हो गई थी?
3.     दादी माँ के स्वभाव का कौन-सा पक्ष आप को सबसे अच्छा लगता है और क्यों?
4.     घर पर होने वाले उत्सवों/समारोहों में बच्चे क्या-क्या करते हैं? अपने और अपने मित्रों के अनुभव के आधार पर लिखिए।







भाषा की बात (व्याकरण)
(i)                समानता बोधक शब्द
नीचे दी गई पंक्तियों पर ध्यान दीजिए और आप भी पाँच वाक्य बनाइए-
ज़रा-सी कठिनाई पड़ते
अनमना-सा हो जाता है
सन -से सफ़ेद
जैसे- खम्भा- सा लम्बा आदमी आ रहा है। बच्चे का गाल सेब-सा लाल है।
अब आप भी पाँच वाक्य लिखिए-
(क)       ---------------------------------------------------------------------
(ख)      ----------------------------------------------------------------------
(ग) ---------------------------------------------------------------------
(घ) ----------------------------------------------------------------------
(ङ)  -----------------------------------------------------------------------
(ii)             दादी माँ कहानी में छू-छूकर ज्वार का अनुमान करती, पूछ-पूछकर घरवालों को परेशान कर देती- जैसे वाक्य आए हैं। किसी क्रिया को ज़ोर देकर कहने के लिए एक से अधिक बार एक ही शब्द प्रयोग  होता है। जैसे वहाँ जा- जाकर थक गया, मैं उसे ढूँढ़-ढूँढ़कर देख लिया। इस प्रकार के आप भी पाँच वाक्य बनाइए।
(क)                    -------------------------------------------------------------------------
(ख)                    ---------------------------------------------------------------------------
(ग)  -------------------------------------------------------------------------
(घ)  ---------------------------------------------------------------------------
(ङ)   -------------------------------------------------------------------------
(iii)          बोलचाल में प्रयोग होने वाले शब्द और वाक्यांश इस पाठ में आए हैं। इन शब्दों और वाक्यांशों से पता चलता है कि यह कहानी किसी विशेष क्षेत्र से संबंधित है।  ऐसे शब्दों और वाक्यांशों में क्षेत्रीय बोलचाल की खूबियाँ होती है।
जैसे- निकसार, बरह्मा, उरिन, चिउड़ा, छौंक,इत्यादि। इन शब्दों का उच्चरण अन्य क्षेत्रीय बोलियों में अलग ढंग से होता है जैसे – निकसार-निकास, बरह्मा-ब्रह्मा, उरिन-उऋण, चिउड़ा-चिड़वा, चूड़त्र,पोहा। छौंक-छौंका,तड़का। इसी प्रकार के 10 शब्द लिखिए जो बोलचाल की भाषा में प्रयोग होता है।
मिट्टी- माटी, मट्टी। घासलेट- मिट्टी का तेल। घना-अधिक। बंदा- व्यक्ति। चादर-चद्दर। प्यार-दुलार। पक्षी-पंछी। नाटक- नौटंकी। कौआ- काग। विवाह- ब्याह,बियाह,शादी। कृष्ण- किशन। घड़ा- मटका, गगरी, घइली। स्नान-नहान।




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