कक्षा दसवीं पाठ 2 (नेता जी का चश्मा)
प्रकरण- नेता जी का
चश्मा
लेखक- स्वयं प्रकाश
शब्दार्थ- कस्बा- छोटा
शहर। प्रतिमा- मूर्ति। बरबाद-
नष्ट। ऊहापोह- करें या न करें का निर्णय न कर पाना।
शासनावधि- संचालन का समय। उत्साही- उत्साह से भरा हुआ। कमसिन-
कम उम्र, अल्हड़। सराहनीय- प्रशंसनीय। इकलौता- अकेला, एकमात्र। खटकना- बुरा
लगना, अनुचित जान पड़ना। कौतुक भरी- उत्सुकता से
परिपूर्ण। चौकोर- चार कोने वाला। आइडिया- विचार। रियल-
वास्तविक, सचमुच का। मज़ाक- हास्य। दुर्दमनीय-
जिसे दबाना या वश में करना कठिन हो। खुशमिजाज- प्रसन्नचित्त। तोंद-पेट।
बत्तीसी-दाँत। द्रवित-
दयार्द्र। मरियल-कमज़ोर। बेचैन-व्याकुल।
कौम-जाति। मजबूर-
बाध्य, विवश। अटेंशन- सावधान
पठित गद्यांश
1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए
प्रश्नों का उत्तर दीजिए- हालदार साहब को हर पंद्रहवें दिन कंपनी के काम
के सिलसिले में उस कस्बे से गुजरना पड़ता था। कस्बा बहुत बड़ा नहीं था, जिसे पक्का
मकान कहा जा सके वैसे कुछ ही मकान और जिसे बाजार कहा जा सके वैसा एक ही बाजार था।
कस्बे में एक लड़कों का स्कूल, एक लड़कियों का स्कूल, एक सीमेंट का छोटा-सा कारखाना, दो ओपन एयर सिनेमाघर और एक ठो
नगरपालिका भी थी। नगरपालिका थी तो कुछ-न-
कुछ करती भी रहती थी। कभी कोई सड़क पक्की
करवा दी, कुछ पेशाबघर बनवा दिए, कभी कबूतरों के लिए छतरी बनवा दी तो कभी कवि
सम्मेलन करवा दिया। इसी नगरपालिका के किसी उत्साही बोर्ड या प्रशासनिक अधिकारी ने
एक बार ‘शहर’ के मुख्य बाजार के मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की एक
संगमरमर की प्रतिमा लगवा दी।
(क)
गद्यांश के आधार पर कस्बे की विशेषताएँ लिखिए।
(ख)
नगरपालिका
अपने दायित्व का निर्वाह किस प्रकार कर रही थी?
(ग)
नगरपालिका
के बोर्ड द्वारा क्या निर्णय लिया गया?
2. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए
प्रश्नों का उत्तर दीजिए- हालदार साहब को पानवाले द्वारा एक
देशभक्त का इस तरह मज़ाक उड़ाया जाना अच्छा नहीं लगा। मुड़कर देखा तो अवाक रह
गए। एक बेहद बूढ़ा मरियल-सा लँगड़ा आदमी
सिर पर गाँधी टोपी और आँखों पर काला चश्मा लगाए एक हाथ में एक छोटी-सी संदूकची और
दूसरे हाथ में बाँस पर टँगे बहुत -से चश्मे लिए अभी-अभी एक गली से निकला था और अब
एक बन्द दुकान के सहारे अपना बाँस टिका रहा था। तो इस बेचारे की दुकान भी नहीं! फेरी लगाता है!
हालदार साहब चक्कर में पड़ गए। पूछना चाहते थे, इसे कैप्टन क्यों कहते हैं? लेकिन पानवाले ने साफ़ बता दिया था कि अब वह इस
बारे में और बात करने को तैयैर नहीं। ड्राइवर भी बेचैन हो रहा था। काम भी था।
हालदार साहब जीप में बैठकर चले गए।
(क)
हालदार
साहब ने कैप्टन को अपनी सोच के वीपरीत कैसे पाया?
(ख)
हालदार
साहब ने कैप्टन चश्मेवाले
को बेचारा क्यों कहा?
(ग)
हालदार साहब को अपनी जिज्ञासा दबाए क्यों लौट
जाना पड़ा?
नेताजी का चश्मा (स्वयं प्रकाश)
प्रश्नोत्तर-
1. सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को
लोग कैप्टन क्यों कहते थे?
उत्तर- सेनानी न होते हुए भी लोग चश्मेवाले को कैप्टन इसलिए कहते थे, क्योंकि-
उत्तर- सेनानी न होते हुए भी लोग चश्मेवाले को कैप्टन इसलिए कहते थे, क्योंकि-
·
कैप्टन चश्मेवाले में नेता जी के प्रति अगाध
लगाव एवं श्रद्धा था।
·
वह शहीदों एवं देश भक्तों के अलावा अपने देश से उसी प्रकार लगाव रखता था
जैसा कि फौजी व्यक्ति रखते हैं।
·
उसमें देश प्रेम एवं देश भक्ति का भाव कूट-कूटकर
भरा था।
·
वह नेता जी की मूर्ति को बिना चश्मे को देखकर
आहत होता था।
2.
हालदार साहब ने ड्राइवर को पहले चौराहे पर गाड़ी रोकने के लिए मना
किया था लेकिन बाद में तुरंत रोकने को कहा-
(क) हालदार साहब पहले मायूस क्यों हो गए थे? उत्तर- हालदार
साहब इसलिए मायूस हो गए थे क्योंकि वे सोचते थे कि कस्बे के चौराहे पर मूर्ति तो
होगी पर उसकी आँखों पर चश्मा न होगा। अब कैप्टन तो जिंदा है नहीं, जो मूर्ति पर
चश्मा लगाए। देशभक्त हालदार साहब को नेताजी की चश्माविहीन मूर्ति उदास कर देती थी।
(ख) मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है?
उत्तर- मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा यह उम्मीद जगाता है कि देश में देश प्रेम एवं देशभक्ति समाप्त नहीं हुई है। बच्चों द्वारा किया गया कार्य स्वस्थ भविष्य का संकेत है। उनमें राष्ट्र प्रेम का बीज अंकुरित हो रहे हैं।
उत्तर- मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा यह उम्मीद जगाता है कि देश में देश प्रेम एवं देशभक्ति समाप्त नहीं हुई है। बच्चों द्वारा किया गया कार्य स्वस्थ भविष्य का संकेत है। उनमें राष्ट्र प्रेम का बीज अंकुरित हो रहे हैं।
(ग) हालदार साहब इतनी-सी बात पर भावुक
क्यों हो उठे?
उत्तर- हालदार साहब सोच रहे थे कि कैप्टन के न रहने से नेताजी की मूर्ति चश्माविहीन होगी परंतु जब यह देखा कि मूर्ति की आँखों पर सरकंडे का चश्मा लगा हुआ है तो उनकी निराशा आशा में बदल गई। उन्होंने समझ लिया कि युवा पीढ़ी में देशप्रेम एवं देशभक्ति की भावना है जो देश के लिए शुभ संकेत है। यह बात सोचकर वे भावुक हो गए।
उत्तर- हालदार साहब सोच रहे थे कि कैप्टन के न रहने से नेताजी की मूर्ति चश्माविहीन होगी परंतु जब यह देखा कि मूर्ति की आँखों पर सरकंडे का चश्मा लगा हुआ है तो उनकी निराशा आशा में बदल गई। उन्होंने समझ लिया कि युवा पीढ़ी में देशप्रेम एवं देशभक्ति की भावना है जो देश के लिए शुभ संकेत है। यह बात सोचकर वे भावुक हो गए।
3. आशय स्पष्ट कीजिए-
“बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश के खातिर
घर-गृहस्थी-जवानी सब कुछ होम देनेवाले पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके
ढूँढ़ती है।” उत्तर- उक्त पंक्ति का आशय यह है कि बहुत से
लोगों ने देश के लिए अपना सबकुछ बलिदान कर दिया। कुछ लोग उनके बलिदान की प्रशंसा न
करके औसे देशभक्तों का उपहास उड़ाते हैं। लोगों में देशभक्ति की औसी घटती भावना
निश्चित रूप से निंदनीय है। ऐसे लोग इस हद तक स्वार्थी होते हैं कि उनके लिए अपना स्वार्थ ही सर्वोपरि होता है। वे
अपने स्वार्थ की सिद्धि का लिए देश द्रोह
करने तक को तैयार हैं।
4. पानवाले का एक रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए-
उत्तर- पानवाला अपनी पान की दुकान
पर बैठा ग्राहकों को पान देने के अलावा उनसे कुछ न कुछ बातें करता रहता था।वह
स्वभाव से खुशमिजाज एवं काला मोटा व्यक्ति है। उसकी तोंद निकली हुई है। वह पान
खाता रहता है जिससे उसकी बत्तीसी लाल-काली हो गई हैं। वह जब हँसता है तो उसकी तोंद
थिरकने लगती है। वह वाक्पटु है जो व्यंग्यात्मक बाते कहने से भी नहीं चूकता है।
अपठित गद्यांश
1. निम्नलिखित
गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
लाखों वर्षों से मधुमक्खी जिस तरह छत्ता
बनाती आई है वैसे ही बनाती है। उसमें फेर-बदल करना उसके लिए संभव नहीं। छत्ता तो
त्रुटिहीन बनता है लेकिन मधुमक्खी अपने अभ्यास के दायरे में आबद्ध रहती है। इस तरह
सभी प्राणियों के संबंध में प्रकृति के व्यवहार में साहस का अभाव दिखाई पड़ता है।
ऐसा लगता है कि प्रकृति ने उन्हें अपने आँचल में सुरक्षित रखा है, उन्हें
विपत्तियों से बचाने के लिए उनकी आंतरिक गतिशीलता को ही प्रकृति ने घटा दिया है।
लेकिन सृष्टिकर्ता ने मनुष्य की रचना करने
में अद्भुत साहस का परिचय दिया है। उसने मानव के अन्तःकरण को बाधाहीन बनाया है।
हालाँकि बाह्य रूप से उसे विवस्त्र, निरस्त्र और दुर्बल बनाकर उसके चित्त को
स्वच्छंदता प्रदान की है। इस मुक्ति से आनंदित होकर मनुष्य कहता है- “हम असाध्य को संभव बनाएँगे।”
अर्थात जो सदा से होता आया है और होता रहेगा, हम उससे संतुष्ट नहीं रहेंगे। जो कभी
नहीं हुआ, वह हमारे द्वारा होगा। इसलिए मनुष्य ने अपने इतिहास के प्रथम युग में जब
प्रचंडकाय प्राणियों के भीषण नखदंतों का सामना किया तो उसने हिरण की तरह पलायन
करना नहीं चाहा, न कछुए की तरह छिपना चाहा। उसने असाध्य लगने वाले कार्य को सिद्ध
किया- पत्थरों को काटकर भीषणतर नखदंतों का निर्माण किया। प्राणियों के नखदंत की
उन्नति केवल प्राक-तिक कारणों पर निर्भर होती है। लेकिन मनुष्य के ये नखदंत उसकी
अपनी सृष्टि क्रिया से निर्मित थे। इसलिए आगे चलकर उसने पत्थरों को छोड़कर लोहे के
हथियार बनाए।इससे यह प्रमणित होता है कि मानवीय अन्तःकरणसंधानशील है। उसके चारों
ओर जो कुछ है उस पर ही वह आसक्त नहीं हो जाता। जो उसके हाथ में नहीं है उस पर
अधिकार जमाना चाहता है।पत्थर उसके सामने रखा पर वह उससे संतुष्ट नहीं। लोहा धरती
के नीचे है, मानव उसे वहाँ से बहर निकालता है। पत्थर को घिसकर हथियार बनाना आसान
है लेकिन वह लोहे को गलाकर, साँचे में डालकर, हथौड़े से पीटकर, सब बाधाओं को पार
करके, उसे अपने अदीन बनाता है। मनुष्य के अन्तःकरण का धर्म यही है कि वह परिश्रम
से केवल सफलता ही नहीं बल्कि आनंद भी प्राप्त करता है।
(क)
मनुष्य की भीतरी और
बाहरी बनावट किस प्रकार की है? 2
(ख)
‘असाध्य के संभव’ बनाने का क्या अर्थ है? स्पष्ट कीजिए। 2
(ग)
मनुष्येतर प्राणियों की रचना में ‘प्रकृति के साहस का अभाव’
का क्या आशय है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए। 2
(घ)
मनुष्य ने लेहे के
हथियार पाने के लिए क्या मेहनत की और क्यों?
2
(ङ)
परिश्रम से क्या प्राप्त होता है? 1
(च)
उपर्युक्त गद्यांश के लिए एक उपयुक्त शीर्षक
दीजिए। 1
कक्षा-कार्य/
गृह-कार्य
1. “वो लँगड़ा क्या जाएगा फौज में। पागल है पागल।” कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी
प्रतिक्रिया लिखिए।
2. निम्नलिखित वाक्य पात्रों की कौन-सी विशेषता की
ओर संकेत करते हैं-
(क)
हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुकते और नेताजी को
निहारते।
(ख)
पानवाला उदास हो गया। उसने पीछे मुड़कर मुँह का
पान थूका और सिर झूकाकर अपनी धोती के सिरे
से आँखें पोंछता हुआ बोला- साहब! कैप्टन मर गया।
(ग)
कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगा देता था।
3. जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात देखा
नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से
लिखिए।
4. कस्बों, शहरों, महानगरों के चौराहे पर किसी- किसी
क्षेत्र के प्रसिदध व्यक्ति की मूर्ति
लगाने का प्रचलन- सा हो गया है-
(क)
इसतरह की मूर्ति लगाने के क्या उद्देश्य हो सकते
हैं?
(ख)
आप अपने इलाके के चौराहे पर किस व्यक्ति की
मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे और क्यों?
(ग)
उस मूर्ति के प्रति आपके एवं दूसरे लोगों के
क्या उत्तरदायित्व होने चाहिए?
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