कक्षा सातवीं पाठ 3(हिमालय की बेटियाँ )


हिमालय की बेटियाँ

लेखक- नागार्जुन

शब्दार्थ- गंभीर- गूढ़, गहरा, शांत। संभ्रांत- शिष्ट, कुलीन। महिला- स्त्री। श्रद्धा- आदर, विश्वास और समर्पण का भाव।  विशाल-बड़ा। उल्लास-खुशी। कौतूहल- जिज्ञासा। बंधुर- गहरी। विस्मय-आश्चर्य। मौन- चुपचाप। प्रवाहित- बहना। श्रेय- अच्छा, शुभ। आकर्षक- अपनी ओर खींचने वाला। लुभावना- मन को भाने वाला।  प्रतिदान- लौटाना। प्रेयसी- प्रेमिका। सचेतन- सजीव। समतल- बराबर सतह का। लोकमाता- कल्याणकारी। उचट- उदास। अचरज- हैरानी में डाल देना। मुदित- मोह लेना। खुमारी- आलस्य। नटी- नर्तकी। पट- पर्दा, वस्त्र। अनुपम- जिसकी उपमा न दी जा सके। अद्भुत-विचित्र, अनोखा।

पाठ पढ़ने के बाद निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(क)                       लिखक ने किन्हें दूर से देखा था?
(ख)                       दूर से देखने पर नदियाँ लेखक को कैसी प्रतीत होती थीं?
(ग)                       लेखक द्वारा धारा में नहाने की तुलना किससे की गई है?
(घ)                       लेखक के मन में नदियों के प्रति कैसे भाव थे?
(ङ)                        नदियों में लेखक को स्नान करना कैसा लगता है?
(च)                       नदियों के भागने का कारण क्या है?
(छ)                      नदियों की बाल लीला कहाँ देखी जा सकती है?
(ज)                      तेज़ वेग से बहती नदियों को देखकर लेखक के मन में क्या विचार उठा?
(झ)                      इन्हें कब बीती बातें याद करने का मौका मिलता होगा?
(ञ)                      हिमालय का चित्रण किस रूप में किया गया है? वह क्या करता होगा?
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न-1.   नदियों को माँ मानने की परंपरा यहाँ काफ़ी पुरानी है। लेकिन लेखक नगार्जुन उन्हें और किन रूपों में देखते हैं?
उत्तर- हमारी भारतीय संस्कृति में नदियों को माँ मानने की परंपरा काफ़ी पुरानी है। लेकिन इस निबंध में लेखक ने नदियों को बेटी, प्रेयसी तथा बहन के रूप में प्रस्तुत किया है। इस पाठ में नदियाँ हिमालय की बेटियाँ हैं। नदियों को सागरों की  प्रेयसी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके अतिरिक्त लेखक ने नदियों को बहन के रूप में दिखाया है।
प्रश्न-2. सिंधु और ब्रह्मपुत्र की क्या विशेषताएँ बताई गई है?
  उत्तर- सिंधु और ब्रह्मपुत्र हिमालय से निकलने वाली प्रमुख और बड़ी नदियाँ हैं। इन दो नदियों के बीच में अन्य दो छोटी-बड़ी नदियाँ बहती है। ये नदियाँ दयालु हिमालय के पिघले दिल की एक-एक बूँद इकट्ठा होकर बनी है। नदियाँ सुन्दर एवं लुभावनी लगती हैं।
प्रश्न-3 काका कालेलकर ने नदियों को लेक माता क्यों कहा है?
  उत्तर- जल ही जीवन है। नदियाँ हमें जल प्रदान कर जीवन दान देती है। नदियाँ लोगों के लिए कल्याणकारी एवं माता के समान पवित्र है। इन नदियों के किनारे ही लोगों ने अपनी पहली बस्ती बसाई और खेती बाड़ी करना शुरु किया।  इसके अलावे ये नदियाँ गाँ और शहरों की गंदगी भी अपने साथ बहाकर ले जाती है। इनका जल भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में विशेष भूमिका निभाता है। मानव के आधुनिकीकरण में  जैसे- बिजली बनाना, सिंचाई के नवीन साधनों आदि में इन्होंने पूरा सहयोग दिया है। मनुष्य के लिए ही नहीं बल्कि पशु-पक्षी, पेड़-पौधों आदि के लिए बहुत जरूरी है। इस प्रकार नदियाँ हमारे लिए कल्याणकारी है। यही कारण है कि काका कालेलकर ने इन्हें लोक माता कहा है।
प्रश्न-4. हिमालय की यात्रा में लेखक ने किन-किन की प्रशंसा की है?
  उत्तर-  हिमालय की यात्रा में लेखक ने नदियों, पर्वतों, बर्फ़ीली पहाड़ियों, हरी-भरी घाटियों तथा महासारों की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।



हिमालय पर कविता
(इसे याद करना है।)

खड़ा हिमालय बता रहा है
डरो न आँधी पानी में।
खड़े रहो तुम अविचल होकर
सब संकट तूफ़ानी में।
डिगो न अपने प्रण से, तो तुम
सब कुछ पा सकते हो प्यारे,
तुम भी ऊँचे उठ सकते हो
छू सकते हो नभ के तारे।
अचल रहा जो अपने पथ पर
लाख मुसीबत आने में
मिली सफलता जग उसको
जीने में मर जाने में।
गृह-कार्य

1.    नदियों से होने वाले लाभों के विषय में अपने माता-पिता से चर्चा करके इस विषय पर बीस पंक्तियों का एक निबंध लिखिए।




हिमालय की बेटियाँ

भाषा की बात


1.    अपनी बात कहते हुए लेख ने अनेक समानताएँ प्रस्तुत की हैं। ऐसी तुलना से अर्थ अधिक स्पष्ट एवं सुन्दर बन जाता है। उदाहरण-
(क)                      संभ्रांत महिला की भाँति प्रतीत होती थीं।
(ख)                     माँ और दादी, मौसी और मामी की की गोद की तरह उनकी धारा में डुबकियाँ लगाया करता।
·       अन्य पाठों से ऐसे पाँच तुलनात्मक प्रयोग वाले वाक्य खोजकर लिखें। विद्यालय खुलने पर कक्षा में सुना सकते हैं।
जैसे-
·        लाल किरण-सी चोंच खोल, चुगते तारक अनार के दाने।
·       उन्होंने संदूक खोलकर एक चमकती-सी चीज़ निकाली।
·       सागर की हिलोर की भाँति उसका यह मदक स्वर गली भर के मकानों में उस ओर तक लहराता हुआ पहुँचता और खिलौने वाला आगे बढ़ जाता।   (आप भी किसी भी अन्य पाठ से पाँच वाक्य खोजें

2.    निर्जीव वस्तुओं को मानव -संबंधी नाम देने से निर्जीव वस्तुएँ भी मानो  जीवित हो उठती हैं। लेखक ने इस पाठ में कई स्थानों पर ऐसे प्रयोग किए हैं, जैसे-
(क)                      परंतु इस बार जब मैं हिमालय के कंधे पर चढ़ा तो वे कुछ और रूप में सामने थीं।
(ख)                      काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता कहा है।                     (पाठ से इसी प्रकार के आप भी उदाहरण ढूँढ़िए-)                         जैसे- संभ्रांत महिला की भाँति प्रतीत होती थी।
     बूढे हिमालय की गोद में नंग-धड़ंग होकर खेलने वाली इन बालिकाओं का रूप...।

3.    आप विशेषण और उसके भेदों से परिचय प्राप्त कर चुके हैं। जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताए उसे विशेषण कहते हैं। विशेषण जिसकी विशेषता बताता है उसे विशेष्य कहा जाता है।                                     जैसे- राम पका आम खाता है। इस वाक्य में पका शब्द विशेषण है एवं आम विशेष्य है। अब नीचे दिए गए विशेषण और विशेष्य का मिलान कीजिए-

विशेषण         विशेष्य          विशेषण         विशेष्य
संभ्रांत           वर्षा            चंचल           जंगल
समतल          महिला          घना            नदियाँ
मूसलाधार        आँगन  
       
4.    अनेक शब्दों को संक्षिप्त करके नए शब्द बनाने कि प्रक्रिया को समास कहते हैं। जैसे- राजा का महल = राजमहल, विद्या का आलय = विद्यालय, रेल पर चलने वाली गाड़ी = रेलगाड़ी, पाठ के लिए शाला = पाठशाला, पाँच आबों (नदियों) का समूह = पंजाब
समास के भेद-
समास के छह भेद है।

·      तत्पुरुष समास
·      कर्मधारय समास
·      द्विगु समास
·      अव्ययीभाव समास
·      बहुब्रीहि समास
·      द्वंद्व समास

तत्पुरुष समास- इस समास का उत्तर पद प्रधान होता है। इसमें कारक चिह्नों का लोप हो जाता है।
जैसे- माखन चोर (माखन को चुराने वाला),  रसभरी (रस से भरी), धनहीन (धन से हीन) राजपुत्र ( राजा का पुत्र) आदि।

कर्मधारय समास- जिस समास के दोनों पदों में विशेषण-विशेष्य या उपमेय- उपमान का संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहा जाता है।
जैसे- नीलगाय, कमल नयन, नीलगगन, आदि।

द्विगु समास- जिस समस्त पद का पूर्वपद संख्यावाची  विशेषण हो उसे द्विगु समास कहा जाता है।
जैसे- तिरंगा, चौराहा, नवरात्र, पंचवटी, पंजाब आदि।

अव्ययीभाव समास- इस समास का पूर्वपद अव्यय होता है।
जैसे- आमरण, आजीवन, रातोंरात, प्रतिदिन, यथाशक्ति आदि।

बहुब्रीहि समास- इस समास के दोनों पद प्रधान न होकर कोई अन्य पद प्रधान होते हैं।
जैसे- नीलकंठ- शिव, दशानन- रावण, लंबोदर- गणेश, चक्रधर-विष्णु, मुरधर-कृष्ण आदि।

द्वंद्व समास- जिस समास के दोनों पद प्रधान हों उसे द्वंद्व समास कहते हैं।
जैसे- माता-पिता, रात-दिन, ऊपर-नाचे, आना-जान, अन्नृ-जल आदि।

गृह-कार्य

1.      द्वंद्व समास के बीस उदाहरण एवं अन्य के पाँच-पाँच उदाहरण लिखिए।

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