कक्षा सातवीं (संवाद-लेखन)
संवाद-लेखन
संवाद का शाब्दिक अर्थ होता है- बातचीत। इसे वार्तालाप भा कहा जाता है। अर्थात दो लोगों की आपसी वार्ता (बातचीत) संवाद कहते हैं। संवाद लिखते समय निम्नलिखित
बातों का ध्यान रखना चहिए।
·
संवाद संक्षिप्त, सरल, एवं
सारगर्भिक होना चाहिए।
·
संवाद की भाषा सरल, पात्रानुकूल होना
चहिए।
·
संवादों में क्रमबद्धता का ध्यान
रखना चहिए अर्थात एक पात्र का संवाद दूसरे संवाद से परस्पर जुड़ा होना चाहिए।
·
पात्रों के मनोभावों एवं मुद्राओं को
कोष्ठकों में लिखना चाहिए।
·
संवादों में भावानुसार विराम-चिह्नों
का प्रयोग करना चहिए।
1. परीक्षा से पहले दो मित्रों के बीच हुई बात-चीत को संवाद के रूप में
लिखिए।
मल्लिका - कहो प्रीति! परीक्षा की
तैयारी कैसी चल रही है?
प्रीति - पूछ मत मल्लिका! मुझे तो डर लग रहा है।
मल्लिका - तभी
दुबली-पतली और सूखती जा रही हो।
प्रीति - तू सुना! तुझे जैसे
परीक्षा की कोई फिकर् ही नहीं है।
मल्लिका - मैं फिक्र
नहीं, तैयारी करती हूँ। मेरी तो तैयारी पूरी है। जब चाहो, परीक्षा ले लो।
प्रीति - तभी तो तुम हट्टी-कट्टी हो।
मल्लिका - वो तो हमेशा
रहती हूँ। मैं तो कक्षा में ही ध्यान से पढ़ती हूँ। फीर परीक्षा से डर ही नहीं
लगता।
प्रीति
- हाँ, बात तो तुम ठीक कह रही हो।
2. पिता और पुत्र के बीच
संवाद
अमर – पिता जी, मुझे अपने दोस्तों के
साथ मॉल जाना है।
पिता – नहीं अमर, तुम अपने दोस्तों
के साथ रहकर घुमक्कड़ होते जा रहे हो। तुमने पढ़ना-लिखना तो बिलकुल ही छोड़ दिया
है।
अमर – नहीं पिता जी, अब मैं पढ़ूँगा,
वादा करता हूँ।
पिता – बेटे, ऐसे वादे तो रोज करते
हो।
अमर – पर इस बार मैं पक्का वायदे
करता हूँ कि आपको 80% से ऊपर
अंक लाकर दिखलाऊँगा।
पिता – और अगर नहीं लाए
तो..............
अमर – फिर आप जैसा कहेंगे, मैं वैसा
करूँगा।
पिता – ठीक है। तुम्हें यह आखिरी
अवसर देता हूँ।
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